अयोगवाह (Ayogvah) किसे कहते हैं? (Ayogwah Kise Kahate Hain) - परिभाषा, उदाहरण

ayogwah kise kahate hain: इस लेख में हम बताने वाले हैं कि अयोगवाह किसे कहते हैं, अयोगवाह कितने होते हैं, अयोगवाह के उदाहरण और अयोगवाह कौन-कौन से हैं। अगर आप अयोगवाह किसे कहते हैं (ayogvah kise kahate hain) के बारे में जानना चाहते हैं तो कृपया इस लेख को पूरा पढ़ें। क्योंकि इस लेख को पढ़ने के बाद आप समझ पाएंगे कि ayogwah kise kahate hain.

अयोगवाह (Ayogvah) किसे कहते हैं? (Ayogwah Kise Kahate Hain) - परिभाषा, उदाहरण
ayogvah kise kahate hain

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अयोगवाह की परिभाषा (Ayogvah Kise Kahate Hain)

अयोगवाह ― अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः) को ही अयोगवाह कहते हैं। यह ऐसा वर्ण है जो न स्वर और न ही व्यंजन है। लेकिन हिंदी वर्णमाला में 'अं' और 'अः' को स्वर और व्यंजन दोनों के साथ लिखने की परंपरा है। 

अयोगवाह कितने होते हैं 

अयोगवाह 2 होते हैं - अं (अनुस्वार) और अः (विसर्ग)।


अनुस्वार (ं)किसे कहते हैं

अनुस्वार (ं) देवनागरी लिपि का एक चिह्न है जो स्वर के बाद आता है और नाक से निकलने वाली ध्वनि को दर्शाता है। अनुस्वार का प्रयोग पंचम वर्ण (ङ, ञ, ण, न, म) के स्थान पर किया जाता है। जैसे― गंगा, पंकज, पंक्ति, पंख, चांदी, भांति, कांच आदि।


विसर्ग (ः) किसे कहते हैं (visarg kise kahate hain)

विसर्ग (ः) एक स्वतंत्र वर्ण नहीं है, बल्कि स्वर पर आश्रित है। यह स्वर के अंत में लगया जाता है और उसे लंबा करता है। जैसे― "रामः"  यहां "राम" शब्द के स्वर "अ" को लंबा करने के लिए विसर्ग का प्रयोग किया गया है।


विसर्ग का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में भी किया जाता है—


• स्वर के अंत में, उसे लंबा करने के लिए। जैसे– रामः, प्रातः, अतः।


• दो स्वरों के बीच, उन्हें जोड़ने के लिए। उदाहरण के लिए– प्रातःकालः, दूःख।


• कुछ संस्कृत शब्दों के अंत में जैसे– प्राणः, चित्तः, अर्थः।


अयोगवाह के उदाहरण

अनुस्वार और विसर्ग के आधार पर अयोगवाह के उदाहरण—

अनुस्वार (ं)

विसर्ग (ः)

चंदा

अतः

लंबा

नमः

अंगूर

रामः

पंचम

प्रातः

अंक

सम्भवतः

अंश

श्यामः

इंसान

शिवः

चंपा

कृष्णः

खंभा

सूर्यः

कंगन

चन्द्र:


अयोगवाह कौन-कौन से हैं

अं और अः ये दोनों ही हिंदी भाषा में अयोगवाह हैं। इन्हें स्वर वर्ण के साथ लिखा जाता है, लेकिन ये स्वर नहीं हैं। इन्हें व्यंजन के साथ भी लिखा जाता है, लेकिन ये व्यंजन भी नहीं हैं।


अयोगवाह का प्रयोग हिंदी भाषा में बहुत कम होता है। यह वर्ण केवल कुछ शब्दों में ही देखने को मिलता है, जैसे― संसार, गंगा, अतः, दुःख इत्यादि।


निष्कर्ष

हम आशा करते हैं कि इस लेख को पढ़ने के बाद आप समझ गए होंगे कि अयोगवाह किसे कहते हैं, अयोगवाह कितने होते हैं, अयोगवाह के उदाहरण और अयोगवाह कौन-कौन से हैं


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