"Vartani ka matlab hota hai kisi shabd ko sahi tarike se likhna, jisse hum uska sahi uchcharan aur arth samajh sake. Yaani, shabdon ko sahi tarah se talikrit karne ki prakriya 'vartani' kahlati hai. Angrezi mein ise 'spelling' kehte hain aur Urdu mein 'hijje' aur Bangla mein 'banan' kehte hain. Hindi mein 'vartani' shabd sabse adhik upyog hota hai."
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वर्तनी (Vartani) : किसी भाषा में शब्दों को सही तरीके से उच्चारित करना और लिखना। हर भाषा में, शब्दों को सही ढंग से उच्चारित करने और लिखने के नियम होते हैं, और इन नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होता है। अच्छी वर्तनी के साथ-साथ व्यक्ति की भाषा और व्यवहार में सुधार होता है, जिससे वह एक अच्छा संचारक बनता है। यही कारण है कि वर्तनी को 'हिज्जी' और 'अक्षर' के नाम से भी जाना जाता है।
वर्तनी (Pronunciation) - जब हम किसी भी भाषा के शब्दों को सही तरीके से बोलते हैं, तो हम उनकी 'वर्तनी' कर रहे होते हैं। यानी, हम उन शब्दों को ठीक तरीके से उच्चरित कर रहे होते हैं। इससे हमारी बातों को अच्छी तरह से समझा जा सकता है।
वर्तनी किसे बोला जाता है : वर्तनी का मतलब होता है किसी शब्द को सही तरीके से लिखना, जिससे हम उसका सही उच्चारण और अर्थ समझ सकें। यानी, शब्दों को सही तरह से तालिकृत करने की प्रक्रिया 'वर्तनी' कहलाती है। अंग्रेजी में इसे 'स्पेलिंग' कहते हैं और उर्दू में 'हिज्जे' और बँगला में 'बनान' कहते हैं। हिंदी में 'वर्तनी' शब्द सबसे अधिक उपयोग होता है।
Vartani ka Arth : शुद्ध वर्तनी का अर्थ है कि किसी भी शब्द को उसी तरह लिखना जैसा कि वह बोला जाता है। जब हम किसी शब्द को बोलते हैं, तो हम उसमें कुछ मात्राएँ लगाते हैं। इन मात्राओं का सही प्रयोग करके ही हम शब्द को शुद्ध रूप में लिख सकते हैं। जैसे – पुष्तक की जगह पुस्तक और फल्ल की जगह फल लिखना शुद्ध वर्तनी का उदाहरण होता है।
वर्तनी का उदाहरण
देखिए, "बाल" और "बात" दो अलग-अलग शब्द हैं, लेकिन उनका उच्चारण एक जैसा है। अब, इन शब्दों को सही तरीके से लिखने के लिए, हमें वर्तनी के नियमों का पालन करना होगा।"बाल" को "बाल" लिखा जाता है, क्योंकि इसका अर्थ है "बाल"। "बात" को "बात" लिखा जाता है, क्योंकि इसका अर्थ है "कुछ कहना"।"
वर्तनी का महत्व
वर्तनी का महत्व इसलिए है क्योंकि यह एक भाषा को एकरूपता देता है और भाषा का सही उपयोग करने से हम विभिन्न भाषाओं के बिगड़ते निरूपणों से बच सकते हैं, इसलिए वर्तनी का महत्व हम सभी के लिए अनिवार्य है।मानक वर्तनी के नियम
Vartani Ke Niyam : वर्तनी की अशुद्धियों से बचने के लिए, हमें शुद्ध उच्चारण का खास ध्यान देना चाहिए। इसके साथ, मानक या सही वर्तनी के कुछ नियम हैं, जिनका पालन करके हम अशुद्धियों से बच सकते हैं —1️⃣ जब एक सर्वनाम के साथ दो विभक्तियाँ आती हैं, तो पहली विभक्ति मूल शब्द के साथ और दूसरी विभक्ति अलग से लिखी जाती है। उदाहरण – उनमें से, उसके साथ, इसके द्वारा आदि।
सर्वनाम – मैं, हम, हमारा, हमारी, हमें, तू, तुम, तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हें, वह, वे, उसका, उनका, उन्हें आदि।
2️⃣ इस नियम का मतलब यह है कि जब किसी वाक्य में सर्वनाम और विभक्ति के बीच में कोई निपात आ जाए, तो निपात और विभक्ति दोनों को सर्वनाम से अलग लिखना चाहिए।
उदाहरण :-
👉 "आप ही के लिए" - यह वाक्य "आप के लिए" भी लिखा जा सकता है। लेकिन "ही" निपात के बिना, वाक्य का अर्थ "आपके लिए" हो जाता है। जबकि सही मतलब "आपके लिए ही" है।
👉 "उस ही से मुझ तक को" - यह वाक्य "उस से मुझ तक को" भी लिखा जा सकता है। लेकिन "ही" और "को" निपात के बिना, वाक्य का अर्थ "उस से मुझ तक" हो जाता है। जबकि सही मतलब "उस से ही मुझ तक को" है।
3️⃣ संस्कृत में, कारक चिह्न (विभक्ति) का उपयोग शब्दों के मतलब को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। ये चिह्न आमतौर पर शब्दों के अंत में आते हैं। आम तौर पर, कारक चिह्न को शब्द से अलग रूप से लिखा जाता है, जबकि सर्वनाम शब्दों के साथ, इन कारक चिह्नों को शब्द के साथ जोड़कर लिखा जाता है। उदाहरण- मैंने राम को, मैं घर से आदि।
4️⃣ पष्ठी तत्पुरुष समास में, अस्पष्टता को दूर करने के लिए एक योजक चिह्न (-) बीच में डालना आवश्यक होता है। इसका एक उदाहरण है — 'भू-तत्व'। यहाँ 'भू' और 'तत्व' दोनों के बीच तथा पष्ठी तत्पुरुष समास का तत्व स्पष्ट हो जाता है।
5️⃣ हम बोल सकते हैं कि संयुक्त क्रियाओं में हम सभी क्रियाएँ अलग-अलग तरीके से लिखते हैं। जैसे कि — "वह खुश हो जाता है" और "वह खाता रहता है"।
6️⃣ उपसर्ग-प्रत्ययवाले शब्द ― ऐसे शब्दों को एक साथ लिखें। जैसे – उपसर्गवाले शब्द - अधपका, प्रतिध्वनि, खुशहाल आदि।
प्रत्ययवाले शब्द - पढ़कर, पढ़वाकर, दूधवाला, लकड़हारा आदि।
7️⃣ हिंदी में बहुत सारे तत्सम शब्द प्रयुक्त होते हैं, उनमें कुछ शब्दों के अंत में हल् आता है। जैसे - महान्, जगत्, विद्वान्, विद्युत् आदि।
8️⃣ कुछ तत्सम शब्दों में विसर्ग (:) का प्रयोग होता है। जैसे – प्रातःकाल, अतः, पुनः, स्वतः आदि।
9️⃣ अरबी, फारसी और अंग्रेजी में कुछ शब्द हैं जिनके नीचे विशेष ध्वनिक चिह्न नहीं होते, लेकिन उनका अर्थ वाक्य के संदर्भ में स्पष्ट होता है। इन शब्दों में बिंदु की आवश्यकता नहीं होती। जैसे - कागज, कब, इज, जीरो, फास्ट, फेल, राज, खैर, गरीब और इसी तरह के शब्द।
🔟 अधिकतर शब्द उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास आदि के नियमों से बनते हैं। जैसे – परि+भाषा = परिभाषा, परिभाषा+इक = पारिभाषिक आदि।
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